ट्रंप ने कहा, ईरान के खिलाफ उनकी कार्रवाई के बिना इज़राइल का अस्तित्व नहीं होता
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 6 नवंबर को कहा कि यदि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो इज़राइल और व्यापक मध्य पूर्व का अस्तित्व नहीं होता। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने इस नतीजे को टालने का श्रेय ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाइयों को दिया। ट्रंप ने लिखा, “कोई यह कहना नहीं चाहता, लेकिन हर कोई जानता है कि यह सच है!” उन्होंने इस दावे को ईरान और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं के प्रति अपनी नीति के परिणामों के आकलन के रूप में पेश किया। यह बयान गुरुवार, 5 नवंबर को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से ईरान के खिलाफ और हमलों की संभावना पर ट्रंप की टिप्पणियों के बाद आया। उन्होंने कहा कि वह देश के बाकी हिस्से को नष्ट करने से बचना पसंद करेंगे, लेकिन उन्हें ऐसा करना पड़ सकता है। संभावित कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “आपको जल्द ही पता चल जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेनाएं तैयार हैं और ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के प्रति अपना विरोध दोहराया। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 22 सितंबर के अपने संबोधन में भी ऐसी ही दलील दी थी। उन्होंने कहा, “मैं ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं रखने दूंगा।” उन्होंने इस प्रतिबद्धता को इज़राइल में 7 अक्टूबर के हमले से जोड़ते हुए कहा कि ईरान ने उन आतंकवादियों को धन दिया, जिन्होंने दर्जनों अमेरिकियों समेत 1,200 लोगों की हत्या की। उन्होंने तर्क दिया कि ईरानी शासन को परमाणु कवच हासिल करने की अनुमति देने से उसका खतरा बढ़ जाएगा।